हर व्यक्ति के जीवन में ऐसा होता है की जब हमारा मन दुखी होता है हम परेशान होते है तो मन में अनेक प्रकार के नकारात्मक विचार आते है एवं वे हमें परेशान करते है। पर यही हम चाहे तो कुछ मंथन करके इन्हे समाप्त कर सकते है
आप जैसे भी हैं उसे सहर्ष स्वीकार करें:
यदि आप समस्या की पहचान नहीं पा रहे , या समाज नहीं पा रहे तो आप अपने सोचने के तरीके में भी परिवर्तन नहीं ला सकते हैं। यदि आप इस बात को स्वीकार कर लें कि आपकी सोच और भावनाएं नकारात्मक हैं और उनके प्रति आपकी वर्तमान प्रतिक्रिया से आप आनंदित नहीं होते हैं तो आप परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने में स्वयं की मदद कर सकते हैं।
अपनी सोच और भावनाओं के आधार पर अपने बारे में कोई निष्कर्ष निकालने का प्रयास न करें:
स्मरण रखें, जो भी विचार आपके मन में आते जाते हैं या जो भी भावनाएं आप अनुभव करते हैं वे स्वयं में “अच्छे” या “बुरे” नहीं होते हैं, वे मात्र विचार और भावनाएं होती हैं। इस मामले में जो चीज आप नियंत्रित कर “सकते” हैं वह है आप द्वारा उनके विश्लेषण का तरीका और उस पर आपके द्वारा होने वाली प्रतिक्रिया।
अपने बारे में जिस चीज को आप भी परिवर्तित नहीं कर सकते हैं, उसे स्वीकार करें।
लक्ष्य निर्धारित करें:
लक्ष्य, हमें जीवन के प्रति और ज्यादा सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है। शोध ऐसा दर्शाते हैं कि भले ही आप लक्ष्य को तुरंत प्राप्त न कर पाएँ परंतु उसके निर्धारण मात्र से आप तुरंत ही अधिक आश्वस्त और आशान्वित महसूस कर सकते हैं।



































