सैम मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 में ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के अमृतसर में हुआ था और सैम मानेकशॉ का पूरा नाम सैम होरमूजजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ था. उनका करियर बड़ा शानदार था 27 जून 2008 को उन्होंने निमोनिया की बीमारी के कारण दुनिया को अलविदा कह दिया. ऊटी तमिलनाडु में पारसी परम्परा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया.
भारत में सेना के शीर्ष पदों पर काबिज सैन्य अधिकारियों में बहुत कम ऐसे हैं जिन्हें खूब शोहरत मिली है.भारत के पहले फील्ड मार्शलसैम मानेकशॉ 1971 के भारत-पाक युद्ध आर्मी चीफ थे.उनके बहादुरी के कई किस्से उपलब्धियां है जो किसी और भारतीय सैन्य अधिकारी के नाम नहीं है. 27 जून को उनकी पुण्यतिथि है. इस मौके पर सैम मानेकशॉ को उनकी प्रेरणादायी उपलब्धियों के साथ याद किया जाता है. उनका कद और सम्मान की मिसाल आज भी दी जाती है.
वर्ष 1971 के युद्ध में जब भारत ने जान सेना के ताकत के बल पर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. उस समय सैम मानेकशॉ उस युद्ध के बड़े हीरो के तौर पर उभरे थे, जिन्होंने रणनीति बनाने से लेकर सेना की अगुवाई की थी और केवल 14 दिनों में पाकिस्तान की हार तय कर दी थी. 1973 में जब वह रिटायर होने से एक दिन पहले ही उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधी दी गई.
मानेकशॉ के सबसे ज्यादा जाना जाता है जब उन्होंने अप्रैल 1971 की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बिना डरे कह दिया था कि सेना युद्ध के लिए तैयार नहीं है. यह कह कर उनका काम लड़कर जीतना है,उन्होंने इंदिरा गांधी से निवेदन किया है कि उन्हें कुछ महीने का वक्त दिया जाए. श्रीमती गांधी ने उनके इस बात को मान लिया और फिर दिसंबर 1971 में भारत-पाक युद्ध शुरू हुआ और मानेकशॉ ने अपनी बात कायम रखते हुए भारत को जीत दिलाई.
बॉलीवुड में उनके नाम पर एक बायोपिक बन रही है. रोनी स्क्रूवाला और मेघना गुलजार इस फिल्म को सैम बहादुर के नाम से बना रहे हैं.. मानेकशॉ की भूमिका मशहूर एक्टर विक्की कौशल निभाएंगे. इस फिल्म के लिए विकी कौशल का पहला लुक साल 2019 में आया



































